Brahma Kumaris Slogans

सदा रूहानी मौज का अनुभव करते रहो तो कभी भी मूंझेंगे नहीं

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सदा रूहानी मौज का अनुभव करते रहो तो कभी भी मूंझेंगे नहीं।

ऐसा सपूत बनो जो बाबा आपके गीत गाये और आप बाबा के गीत गाओ

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ऐसा सपूत बनो जो बाबा आपके गीत गाये और आप बाबा के गीत गाओ।

नि:स्वार्थ और निर्विकल्प स्थिति

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नि:स्वार्थ और निर्विकल्प स्थिति से सेवा करने वाले ही सफलता मूर्त हैं।

अपने हर्षितमुख चेहरे से सर्व प्राप्तियों की अनुभूति कराना सच्ची सेवा है

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अपने हर्षितमुख चेहरे से सर्व प्राप्तियों की अनुभूति कराना-सच्ची सेवा है।

हर परिस्थिति को उड़ती कला का साधन समझकर सदा उड़ते रहो

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हर परिस्थिति को उड़ती कला का साधन समझकर सदा उड़ते रहो।

एक बाबा शब्द ही सर्व खजानों की चाबी है

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एक `बाबा’ शब्द ही सर्व खजानों की चाबी है-इस चाबी को सदा सम्भालकर रखो।

अपनी रूहानी व्यक्तित्व को स्मृति में रखो तो मायाजीत बन जायेंगे

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अपनी रूहानी व्यक्तित्व को स्मृति में रखो तो मायाजीत बन जायेंगे।

स्वच्छता और सत्यता

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स्वच्छता और सत्यता में सम्पन्न बनना ही सच्ची पवित्रता है।

व्यर्थ बातों में समय और संकल्प गवाना

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व्यर्थ बातों में समय और संकल्प गवाना-यह भी अपवित्रता है।

अशरीरी स्थिति का अनुभव व अभ्यास ही नम्बर आगे आने का आधार है

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अशरीरी स्थिति का अनुभव व अभ्यास ही नम्बर आगे आने का आधार है।

अपनी चलन और चेहरे से पवित्रता की श्रेष्ठता का अनुभव कराओ

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अपनी चलन और चेहरे से पवित्रता की श्रेष्ठता का अनुभव कराओ।

अपना दैवी स्वरूप सदा स्मृति में रहे

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अपना दैवी स्वरूप सदा स्मृति में रहे तो कोई की भी व्यर्थ नजर नहीं जा सकती।

वानप्रस्थ स्थिति का अनुभव करो

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वानप्रस्थ स्थिति का अनुभव करो और कराओ तो बचपन के खेल समाप्त हो जायेंगे।

अन्तर्मुखता से मुख को बन्द कर दो तो क्रोध समाप्त हो जायेगा

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अन्तर्मुखता से मुख को बन्द कर दो तो क्रोध समाप्त हो जायेगा।

स्थिति सदा खजानों से सम्पन्न और सन्तुष्ट रहे

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स्थिति सदा खजानों से सम्पन्न और सन्तुष्ट रहे तो परिस्थितियाँ बदल जायेंगी।

सन्तुष्टता की सीट पर बैठकर परिस्थितियों का खेल देखने वाले ही सन्तुष्टमणि हैं

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सन्तुष्टता की सीट पर बैठकर परिस्थितियों का खेल देखने वाले ही सन्तुष्टमणि हैं।

सत्यता की विशेषता द्वारा खुशी और शक्ति की अनुभूति करते चलो

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सत्यता की विशेषता द्वारा खुशी और शक्ति की अनुभूति करते चलो।

सेवा का भाग्य प्राप्त होना ही सबसे बड़ा भाग्य है

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सेवा का भाग्य प्राप्त होना ही सबसे बड़ा भाग्य है।

अभी का प्रत्यक्षफल आत्मा को उड़ती कला का बल देता है

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अभी का प्रत्यक्षफल आत्मा को उड़ती कला का बल देता है।

खजानों को सेवा में लगाना अर्थात् जमा का खाता बढ़ाना

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खजानों को सेवा में लगाना अर्थात् जमा का खाता बढ़ाना।